नई दिल्ली. चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों के दौरान 18 सरकारी बैंकों (Public Sector Banks) में कुल 8,926 फ्रॉड (Bank Frauds) के मामले सामने आए हैं. इन सभी फ्रॉड में सभी 18 सरकारों बैंकों को करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. ये जानकारी एक RTI सवाल के जवाब से मिला है. इस RTI के जवाब से पता चलता है कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को सबसे अधिक झटका लगा है.
सबसे अधिक SBI को चपत
RTI आवेदक चंद्रशेखर गौर ने बताया है कि इस RTI का जवाब भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) द्वारा दिया गया है. इस RTI से पता चलता है कि एसबीआई बैंक में फ्रॉड के कुल 4,769 मामले हैं, जिसमें बैंक को कुल 30,300 करोड़ रुपये का नुकसान होने की संभावना है. ये आंकड़ा चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाही यानी अप्रैल से दिसंबर के बीच की है.
SBI में हुए फ्रॉड की रकम, कुल फ्रॉड की रकम 1.17 लाख करोड़ रुपये का 26 फीसदी है. SBI के अलावा पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में ऐसे 294 मामले सामने आए हैं और इस बैंक को 14,928.62 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. बैंक ऑफ बड़ौदा में ऐसे 250 मामले हैं और इस बैंक को कुल 11,166.19 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
इलाहाबाद बैंक में ऐसे फ्रॉड के मामलों की संख्या 860 है. इन फ्रॉड्स से इलाहाबाद बैंक को 6,781.57 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. जबकि, बैंक ऑफ इंडिया को 161 फ्रॉड के मामलों से 6,621.12 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 292 फ्रॉड के जरिए 5,604.55 करोड़ रुपये की चपत लगी है.
इंडियन ओवरसीज बैंक को ऐसे 151 मामलों में 5,556.64 करोड़ रुपये और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को कुल 282 मामलों में 4,899.27 रुपये की चपत लगी है.
इन बैंकों में भी 31 हजार करोड़ रुपये की चपत
1,867 मामलों के अलावा, केनरा बैंक, यूको बैंक, सिंडिकेट बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक में कुल 31,600.76 करोड़ रुपये के फ्रॉड के मामले सामने आए हैं.
हालांकि, इस RTI में केंद्रीय बैंक ने इन बैंक फ्रॉड मामलों के नेचर के बारे में कोई जानकारी नहीं दिया है. इसमें यह भी जानकारी नहीं दी गई है कि बैंक को कितना नुकसान हुआ है.